विवाह के कार्यक्रमों में देखने में आता होगा “महिला संगीत”

 पहले यह नव विवाहित जोड़े को आशीर्वाद देने, गीत के माध्यम से शिक्षा देने एवं हरि भजन के लिए होता था। 

इस कार्यक्रम में अब पुरुष भी आने लगे है। हरि भजन तो होता नहीं। और शिक्षा तो दूर की बात, घर के बड़े बूढ़े भी अमर्यादित आचरण करते है/बढ़ावा देते है।

पुत्र पुत्री वर वधु क्या आयु बड़े छोटे … कोई मर्यादा नहीं रखी जाती हैं। 

इस गंदगी को और बढ़ावा देने के लिए नचैया, चलैया और गवैया को भी पैसे देकर बुलाया जाता है। 

चोरियोग्राफर (नचैया) एंकर (चलैया) और डीजे (गवैया)

अत: साधु जनों के हित के लिए इस कार्यक्रम का नाम बदल कर

“मर्यादा भंग-गीत” रख ले तो अधिक उचित रहेगा। 

इससे भगवान्, कुल देवता, देवता गण, पूर्वज, पितृ गणों और साधु जनों को जब निमंत्रण मिलेगा तब वो इस संस्कारों और मर्यादा भंग के अधर्म में पधारकर अपमानित नही होंगे।