— अपनी मातृभाषा में पढ़ना और लिखना शर्म की बात नही।
— आपको यदि दूसरी भाषा नहीं आती तो कोई शर्म की बात नही।
— अपने स्वदेशी वस्त्र पहनकर पाठशाला, कार्यालय इत्यादि जाना शर्म की बात नही
— अपने कुल, परिवार के भोजन के नियम पालन करना (बैठ कर, चुप रहकर, जूते चप्पल उतार कर) शर्म की बात नहीं
यह सब शर्म की नही धर्म की बात है। आत्म सम्मान की बात है।
वनस्थली विद्यापीठ के संस्थापक पण्डित शास्त्री जी (पूज्य आपाजी) की एक कविता एक पंक्ति है –
भारतीय संस्कृति में जीवित श्रद्धा नमो नम:
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