सनातन धर्म की शक्ति ऐसी है कि जो भी भारत के हित में कार्य करेगा, उसकी रक्षा के लिए धर्म स्वयं ही आगे आ जाएगा। धर्म नदी की तरह निर्मल और गतिशील है; आवश्यकता पड़ने पर वह अपना मार्ग बदल… Continue Reading →
विद्या की पिपासा “एजुकेशन” से नहीं, ज्ञान से शान्त होती है। पेट की अग्नि “पिज़्ज़ा” से नहीं, माँ की बनाई घर की रोटी से तृप्त होती है। खरीदारी का आनन्द “मॉल” से नहीं, नगर के पुराने बाज़ार की रौनक से… Continue Reading →
— अपनी मातृभाषा में पढ़ना और लिखना शर्म की बात नही। — आपको यदि दूसरी भाषा नहीं आती तो कोई शर्म की बात नही। — अपने स्वदेशी वस्त्र पहनकर पाठशाला, कार्यालय इत्यादि जाना शर्म की बात नही — अपने कुल,… Continue Reading →
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